हिंदू धर्म और भारतीय पाक कला में 'छप्पन भोग' का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। विशेषकर भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में डूबे ब्रज क्षेत्र में प्रभु को 56 प्रकार के पकवान अर्पित करने की परंपरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन 56 भोगों के भीतर 'बारह व्यंजन' की एक और अद्भुत कला छिपी है?
आइए, आज के इस लेख में जानते हैं इस अलौकिक परंपरा के पीछे की कथा और इसके पीछे का विज्ञान।
क्यों लगाया जाता है 56 भोग? (पौराणिक आधार)
छप्पन भोग की शुरुआत गोवर्धन लीला से मानी जाती है। कथा के अनुसार, जब इंद्र के अहंकार को तोड़ने और ब्रजवासियों की रक्षा के लिए श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाया था, तब वे लगातार 7 दिनों तक बिना अन्न-जल के रहे थे।
श्री कृष्ण सामान्यतः दिन में 8 पहर भोजन करते थे। जब 7 दिन बाद बारिश रुकी और पर्वत नीचे रखा गया, तब ब्रजवासियों ने उनके प्रति अपना प्रेम प्रकट करने के लिए उन 7 दिनों के बदले (7 दिन × 8 पहर = 56) कुल 56 प्रकार के व्यंजन बनाकर उन्हें भेंट किए। तभी से यह 'छप्पन भोग' की परंपरा अमर हो गई।
अद्भुत कला: एक सब्जी से 'बारह व्यंजन'
छप्पन भोग की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसमें विविधता (Variety) पर बहुत जोर दिया जाता है। जैसा कि कहा जाता है, एक ही मुख्य सामग्री को 12 अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है, जिसे 'बारह व्यंजन' कहते हैं।
उदाहरण के तौर पर, यदि अरबी या कच्चा केला लिया जाए, तो उसे इन 12 रूपों में तैयार किया जा सकता है:
तली हुई (Crispy Fried)
रसेदार (Curry)
सूखी सब्जी
दही वाली
भरवां (Stuffed)
मीठी (Sweet Glazed)
खट्टी/चटपटी
कुचली हुई (Mashed/Chokha)
कढ़ी स्वरूप
दूध/मलाई वाली
सादा/उबली हुई (Sautéed)
विशेष मसालों वाली
इसी प्रकार, दूध के भी 12 स्वरूप (जैसे माखन, मिश्री, दही, रबड़ी, पनीर, घी आदि) इस भोग का मुख्य हिस्सा होते हैं। यह दर्शाता है कि प्राचीन भारतीय पाक कला कितनी समृद्ध थी।
छप्पन भोग की विस्तृत सूची (56 Bhog List)
भोग की थाली को मुख्य रूप से इन श्रेणियों में बांटा जाता है:
मिठाइयाँ: रसगुल्ला, चन्द्रकला, रबड़ी, जलेबी, मालपुआ, पेड़ा, घेवर, लड्डू, बर्फी, इमरती, खीर।
अनाज और नमकीन: दाल, भात (चावल), पूरी, कचौड़ी, खिचड़ी, कढ़ी, पनीर की सब्जी, साग, कोफ्ता, पकोड़े, पापड़।
डेयरी उत्पाद: ताज़ा माखन, मिश्री, मलाई, दही, छाछ, लस्सी, घी, शहद।
फल और मेवे: सेब, केला, आम, अंगूर, बादाम, काजू, पिस्ता, किशमिश, मखाना।
पाचक और पेय: अचार, चटनी, मुरब्बा, शिकंजी, इलायची, लौंग और अंत में पान (बीड़ा)।
निष्कर्ष
छप्पन भोग और बारह व्यंजन केवल भोजन नहीं, बल्कि भक्त की वह भावना है जहाँ वह अपने आराध्य को संसार की हर मिठास और स्वाद अर्पित करना चाहता है। यह परंपरा हमें सिखाती है कि श्रद्धा हो तो एक साधारण सब्जी को भी 12 स्वरूपों में बदलकर 'प्रसाद' बनाया जा सकता है।
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