कहानी : “जो इतिहास चुना गया”
गुरुकुल की कक्षा में आज असामान्य मौन था।
शिष्य आर्य के हाथ में दिल्ली का एक पुराना मानचित्र था। वह बार-बार उसे देख रहा था।
अंततः वह बोला—
शिष्य – गुरुदेव, एक बात मुझे खटक रही है।
कहा जाता है कि अंग्रेज़ों ने दिल्ली की सड़कों के नाम मुग़ल शासकों पर रखे।
पर क्या अंग्रेज़ यह नहीं जानते थे कि दिल्ली मुग़लों से बहुत पहले भी राजधानी रही है?
गुरुजी ने गंभीर स्वर में कहा—
गुरु – वत्स, यह प्रश्न अज्ञान का नहीं, चयन का है।
शिष्य चौंक गया।
शिष्य – चयन? पर इतिहास तो एक ही होता है न?
गुरुजी बोले—
गुरु – इतिहास एक होता है,
लेकिन सत्ता तय करती है कि उसमें से क्या दिखाया जाएगा और क्या छुपाया जाएगा।
उन्होंने मानचित्र की ओर इशारा किया।
गुरु – अंग्रेज़ भली-भाँति जानते थे कि
दिल्ली का सबसे प्राचीन नाम इंद्रप्रस्थ है।
वे जानते थे कि यहाँ पांडवों का किला,
आज का पुराना क़िला,
और महाभारत काल की राजधानी थी।
वे यह भी जानते थे कि
दिल्ली सात नहीं, बल्कि कई सभ्यताओं की राजधानी रही है।
शिष्य ने पूछा—
शिष्य – फिर उन्होंने इंद्रप्रस्थ मार्ग, युधिष्ठिर मार्ग, भीमसेन मार्ग क्यों नहीं बनाए?
गुरुजी कुछ क्षण मौन रहे, फिर बोले—
गुरु – क्योंकि अंग्रेज़ इतिहास नहीं लिख रहे थे,
वे शासन को वैध ठहराने की कथा गढ़ रहे थे।
उन्होंने आगे समझाया—
गुरु – अंग्रेज़ों के लिए मुग़ल शासन एक सुविधाजनक सेतु था।
मुग़ल भी बाहरी थे, अंग्रेज़ भी।
मुग़ल साम्राज्य टूट चुका था, अंग्रेज़ उसका उत्तराधिकारी बनना चाहते थे।
यदि वे इंद्रप्रस्थ को केंद्र में रखते,
तो उन्हें यह स्वीकार करना पड़ता कि भारत की सभ्यता
हज़ारों वर्ष पुरानी, स्वशासित और निरंतर रही है।
यह स्वीकार करना
औपनिवेशिक मानसिकता के विरुद्ध था।
शिष्य की आँखें खुलने लगीं।
शिष्य – तो क्या मुग़ल नाम रखना इतिहास का सम्मान नहीं, बल्कि रणनीति थी?
गुरु – बिल्कुल।
यह अज्ञान नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया चयन था।
उन्होंने अंतिम बात कही—
“जिस इतिहास को सत्ता चुनती है,
वह स्मृति बनता है।
और जिसे नकारा जाता है,
वह प्रश्न बनकर अगली पीढ़ी के मन में लौटता है।”
शिष्य ने शांत स्वर में कहा—
शिष्य – तब हमारा कर्तव्य है
न तो किसी काल को अंधभक्ति से पूजना,
न ही किसी काल को भूल जाना।
गुरुजी मुस्कराए—
गुरु – यही विवेक है, वत्स।
यही सच्चा इतिहासबोध।
कहानी की सीख (Moral):
इतिहास वह नहीं होता जो नहीं पता था,
इतिहास वह होता है जिसे जानबूझकर चुना गया।
विवेकपूर्ण प्रश्न ही सभ्यता को जीवित रखते हैं।

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